कोरोनावायरस वैक्सीन की 2 खुराकें लेने के बाद व्यक्ति हुआ संक्रमित

कोरोनावायरस वैक्सीन की 2 खुराकें लेने के बाद व्यक्ति हुआ संक्रमित 

 

 

डॉक्टरों ने कहा कि वह नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर (NIV) सपोर्ट पर है लेकिन उसके विटल्स स्थिर हैं. “उनके फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. हम उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की योजना बना रहे हैं. वह निरीक्षण में है, ”एक डॉक्टर ने कहा.

 

उड़ीसा में मिले एक ताज़ा मामले के अनुसार कोरोनावायरस की 'कोविशील्ड' वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के 10 दिन बाद टिटलागढ़ का एक 57 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित हो गया और उसे कथित रूप से गंभीर स्थिति में एसयूएम कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 

 

डॉक्टरों ने कहा कि फ़िलहाल वह व्यक्ति नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर (NIV) सपोर्ट पर है लेकिन उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है. एक डॉक्टर ने कहा कि "उनके फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. हम उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की योजना बना रहे हैं. वह हमारे निरीक्षण में हैं".

 

इस मरीज ने बीती 6 फरवरी 2021 को कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खुराक ली थी और 10 मार्च को उसकी दूसरी खुराक ली थी. इसके दस दिन बाद उसके अंदर कोरोनावायरस के कुछ लक्षण विकसित हुए और उसके परिवार के सदस्य उसे बलांगीर के कोविड अस्पताल ले गए, जहाँ उसकी नाक से द्रव का नमूना लिया गया और उसे कोरोनावायरस से पुनः संक्रमित पाया गया. वहां इलाज कराने के तीन दिन बाद उसे भुवनेश्वर रेफर कर दिया गया, और भुवनेश्वर नगर निगम (BMC) ने उसे SUM कोविड अस्पताल में भर्ती करवा दिया. 

 

रोगी के एक रिश्तेदार ने कहा कि "हमें बिल्कुल भी अनुमान नहीं था कि कोरोनावायरस वैक्सीन की दोनों खुराकें लेने के बाद भी वह संक्रमित हो जाएँगे. जब कोरोनावायरस की जाँच में वह पॉज़िटिव पाए गए, तब कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि वे दोनों खुराक ले चुके हैं अतः वह ठीक हो जाएँगे. लेकिन अब हम उनकी लगातार ख़राब होती जा रही स्थिति को लेकर चिंतित हैं". 

 

शहर के अधिकारियों द्वारा इस रोगी का विवरण केंद्र सरकार को भेजे जाने की संभावना है. एक स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि "कोरोनावायरस वैक्सीन के टीके की दोनों खुराकें लेने के बाद भी लोगों के संक्रमित होने के लगभग 10 मामले हमारे सामने आए हैं. हम इनके विवरण से केंद्र सरकार को अवगत करवाएँगे". 

 

इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (ILS) के निदेशक अजय परिदा ने कहा कि इस रोगी की एंटीबॉडी प्रोफाइल की जांच की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि शायद ऐसे मामलों में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कम है और कई मामलों में कोरोनावायरस वैक्सीन का टीका भी पर्याप्त एंटीबॉडी विकसित नहीं कर सकता है क्योंकि इसकी प्रभावकारिता 90% के करीब ही आँकी गई है.