जानें शीघ्रपतन से जुड़ी यह ख़ास बातें

जानें शीघ्रपतन से जुड़ी यह ख़ास बातें 

 

शीघ्रपतन (जिसे शीघ्र स्खलन व अनियंत्रित चरमोत्कर्ष नाम से भी जाना जाता है) पुरुषों को प्रभावित करने वाला सबसे आम यौन विकार है. विश्व प्रसिद्ध मेयो क्लीनिक द्वारा किए गए शोध सहित कई व्यापक अध्ययनों के अनुसार, समय से पहले स्खलन एक ऐसी समस्या है जो उम्र, जातीयता व सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे कारकों से परे सभी वर्गों के 30% से अधिक पुरुषों को प्रभावित करती है. हालाँकि कुछ अन्य विशेषज्ञों ने संख्या को 50% पुरुषों के बराबर बताया है. 

 

हालाँकि यह परिणाम चौंका देने वाले हैं, फिर भी अच्छी खबर यह है कि आप शीघ्रपतन का इलाज सुरक्षित और स्वाभाविक रूप से कर सकते हैं, और कई बार इसके लिए साधारण घरेलू उपचार ही पर्याप्त हैं. 

 

पुरुषों के कई अन्य यौन विकारों से उलट शीघ्रपतन की कोई एक विलक्षण परिभाषा नहीं है. मोटे तौर पर, समय से पहले स्खलन की स्थिति सेक्स के दौरान तब मानी जाती है जब पुरुष अपनी साथी की तुलना में जल्दी स्खलित हो जाते हैं. हालाँकि कई चिकित्सा विशेषज्ञ शीघ्रपतन की समस्या को न्यूनतम एक मिनट से अधिक समय तक सुखदायक संभोग करने में असमर्थता के रूप में परिभाषित करते हैं. 

 

यद्यपि शीघ्रपतन के लक्षण और प्रकार इस परिभाषा से भिन्न भी हो सकते हैं. मूलतः शीघ्रपतन का प्राथमिक लक्षण यौन क्रीड़ा के बाद एक मिनट के भीतर चरमोत्कर्ष को प्राप्त कर लेना है, वहीं कुछ लोग अन्य अंतरंग स्थितियों जैसे मात्र चुंबन या हस्तमैथुन इत्यादि में भी इस स्थिति को प्राप्त हो सकते हैं. 

 

मेयो क्लिनिक के अनुसार, शीघ्रपतन दो प्रकार के होते हैं:

 

आजीवन शीघ्रपतन - यह ऐसा शीघ्रपतन होता है जो किसी पुरुष के जीवन में उसके पहले यौन अनुभव से शुरू होता है. 

आयातित शीघ्रपतन - किसी पुरुष के पहले यौन अनुभव के बाद विकसित होने वाले शीघ्रपतन को आयातित शीघ्रपतन कहा जाता है. 

शीघ्रपतन के कारणों में प्रमुखतः शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक कारक शामिल हो सकते हैं, जिनमें शिश्न की नसों का अत्यधिक संवेदनशील होना, अतिसक्रिय या हाइपरएक्टिव रिफ्लेक्सिस, कमजोर पेल्विक मांसपेशियां, अत्यधिक उत्तेजना, अनैतिक यौन गतिविधि, बेहतर यौन क्षमता के प्रदर्शन की चिंता, प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन या संक्रमण, अवसाद व चिंता इत्यादि शामिल हैं. शीघ्रपतन का संबंध स्तंभन में कमी या इरेक्टाइल डिसफंक्शन से भी हो सकता है, जिसमें तेजी से स्खलन के साथ ही चरमोत्कर्ष की इच्छा शेष रह जाती है. 

 

कारण चाहे जो भी हों, यह पुरुषों के लिए सबसे प्रमुख यौन विकारों में से एक है. दुर्भाग्य से, एक बार शीघ्रपतन हो जाने के बाद इसका भय ऐसा मानसिक दबाव पैदा करता है जोकि भविष्य में भी शीघ्रपतन को प्रेरित कर सकता है. इस तरह यह एक दुष्चक्र का निर्माण कर देता है.  

 

हालाँकि, अच्छी खबर यह है कि इस दुष्चक्र को बाधित किया जा सकता है. अपने शरीर और यौन प्रदर्शन पर नियंत्रण कर के शीघ्रपतन या अल्प चरमोत्कर्ष का सुरक्षित और स्वाभाविक रूप से इलाज किया जा सकता है. ज्यादातर मामलों में, इसके लिए नकारात्मक दुष्प्रभावों वाली दवाओं या ओवर-द-काउंटर दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ती है.

 

पुरुष के लिंग को श्रोणि मांसपेशियों या पैल्विक मसल्स के नाम से जानी जाती छोटी मांसपेशियों की एक श्रृंखला द्वारा नियंत्रित किया जाता है. ये मांसपेशियां लिंग में रक्त को मजबूर करने और इसे वापस बहने से रोकने के लिए जिम्मेदार होती हैं, जिससे कठोर मांसपेशियों के ऊतकों का निर्माण होता है. दुर्भाग्य से, पुरुषों की पैल्विक मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से कमजोर होती हैं और उम्र के साथ कमजोर हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप आयु के साथ शीघ्रपतन की समस्या जन्म लेती है और यौन प्रदर्शन कम हो जाता है. पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर भी उम्र के साथ कम हो जाता है, जो कि औसत संभोग अवधि को कम करता है. 

 

पैल्विक मांसपेशियों को एक विशिष्ट अभ्यास के साथ मजबूत किया जा सकता है, जिसे केगेल व्यायाम के नाम से जाना जाता है. इसके अतिरिक्त स्वस्थ रक्त प्रवाह भी लंबे समय तक चलने वाले स्तंभन को मज़बूती देता है. तथा लिंग को कठोर बनाने और शीघ्रपतन को रोकने में मदद करने के लिए बेहतरीन रक्त प्रवाह, उच्च टेस्टोस्टेरोन और ऊंचे नाइट्रिक ऑक्साइड स्तर की आवश्यकता होती है.