फिनलैंड के हवाई अड्डे पर कुत्ते कर रहे हैं कोरोना टेस्ट

फिनलैंड में इन दिनों एक आश्चर्यजनक काम हो रहा है। वहाँ के कुत्ते यात्रियों की गर्दन के पसीने को सूँघकर कोरोनावायरस का पता लगा रहे हैं। फिनलैंड के हेलसिंकी हवाई अड्डे पर पहुंचने वाले यात्रियों का इन कुत्तों द्वारा परीक्षण करवाया जा रहा है।

एक परीक्षण परियोजना के अंतर्गत इस हवाई अड्डे ने यह स्वैच्छिक कोरोनावायरस परीक्षण प्रारंभ किए हैं जिन में केवल 10 सेकंड लगते हैं तथा इसके लिए नाक के अंदर कोई बारीक सी छड़ी डाल कर नमूना लेने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती है। द न्यू यॉर्क टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, यहाँ आने वाले यात्रियों के पसीने को सूँघकर वायरस का पता लगाने के लिए दो कुत्ते प्रशिक्षित किए गए हैं जो इस काम को अंजाम देते हैं। 

यह पूरी प्रक्रिया इस तरह से काम करती है: हवाई अड्डे से अपना सामान प्राप्त करने के बाद यात्री स्वैच्छिक रूप से अपनी गर्दन से पसीना पोंछ सकते हैं और उसका नमूना एक डिब्बे में छोड़ सकते हैं। फिर एक ट्रेनर इन नमूनों को कुत्तों द्वारा सूंघने के लिए रखे गए अन्य नमूनों वाले डिब्बे में रख देता है।

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक मिनट का समय लगता है। यदि कुत्ते को गर्दन के पसीने से उस व्यक्ति के कोरोना पॉज़िटिव होने का संकेत मिलता है, तो उस व्यक्ति को मुफ्त वायरस परीक्षण के लिए हवाई अड्डे के स्वास्थ्य केंद्र में भेजा जाता है, जहाँ उसका विस्तृत परीक्षण किया जाता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेलसिंकी की शोधकर्ता अन्ना हिल्म-ब्योर्कमैन ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि मानक पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन या एंटीबॉडी परीक्षणों की तुलना में, इन कुत्तों द्वारा सूंघने का परीक्षण कोरोनावायरस संक्रमण का पता लगाने में अधिक प्रभावी हो सकता है, ।

यह कुत्ते उन लोगों का भी पता लगा सकते हैं जो अभी तक कोरोना पॉजिटिव नहीं हैं, लेकिन एक हफ्ते के भीतर कोरोना पॉजिटिव हो जाएंगे, हिल्म-ब्योर्कमैन ने परीक्षण करने वाले कुत्तों के बारे में कहा।

इस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की समीक्षा के अनुसार फ़िलहाल वहाँ केवल दो कुत्ते ही रोग परीक्षक के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन 14 अन्य कुत्तों को इस काम के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

कुछ कुत्ते बहुत कम समय में वायरस को सूँघना सीख सकते हैं। कोसी नाम के एक 8 वर्षीय ग्रेहाउंड कुत्ते ने कोरोनावायरस की गंध को केवल सात मिनट में पहचानना सीख लिया।

हालांकि दुनिया भर में कई कुत्तों को कोरोना पॉज़िटिव पाया गया है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि ये जानवर मनुष्यों तक यह बीमारी पहुंचा सकते हैं।

संक्रमित मनुष्यों के संपर्क में आने वाले कई कुत्तों और बिल्लियों को कोरोना पॉज़िटिव पाया जा चुका है। प्रायोगिक परिस्थितियों में कुत्ते और बिल्लियाँ अपनी ही प्रजाति के अन्य जानवरों में संक्रमण फैलाने में सक्षम पाए गए थे। हालांकि, अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये जानवर मनुष्यों में यह बीमारी पहुंचा सकते हैं और कोरोनावायरस का प्रसार कर सकते हैं। कोरोनावायरस मुख्य रूप से एक संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने पर उत्पन्न होने वाली बूंदों से फैलता है।

हालाँकि कुछ मामलों में खेतों पर रहने वाले ऊदबिलावों के भी कोरोनावायरस से ग्रस्त होने का पता चला है। इस बात की सबसे अधिक संभावना है कि वे खेत पर काम करने वाले श्रमिकों द्वारा संक्रमित हो गए होंगे। कुछ उदाहरणों में, मनुष्यों द्वारा संक्रमित मिंक द्वारा इस वायरस का संक्रमण अन्य मनुष्यों तक पहुंचा है। यह इस रोग के पशुओं द्वारा मानवों तक पहुँचने के पहले सूचित मामले हैं।

विशेषज्ञों द्वारा अभी भी यह ताक़ीद की जाती है कि जो लोग कोरोनावायरस से ग्रस्त हैं और जो लोग इससे संक्रमित होने के जोखिम के दायरे में हैं वे अपने पालतू पशुओं के साथ संपर्क को सीमित कर दें। पशुओं की देखभाल और देखभाल करते समय, बुनियादी स्वच्छता उपायों को हमेशा लागू किया जाना चाहिए। 

हाइलम-ब्योर्कमैन ने कहा कि यदि इन कुत्तों ने कोरोनावायरस की जाँच करने में अपनी प्रभावशीलता साबित कर दी, तो इन्हें नर्सिंग होम, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले अन्य स्थानों पर भी तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन कुत्तों की मदद से हम अपने बंद हो चुके समाजों को एक और तरीके से खोल सकते हैं। 

इस परीक्षण के पहले चरण अस्पतालों और पशु चिकित्सा क्लीनिकों के एक नेटवर्क, एविडेंसिया ने वित्त पोषित किया है। संस्था के प्रतिनिधि, विर्पी पेरला ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि फिनलैंड को अपने स्कूलों, मॉल और वरिष्ठ नागरिक आश्रयघरों की जाँच करने के लिए लगभग 700 से 1,000 कोरोनोवायरस सूँघने वाले कुत्तों की आवश्यकता होगी। 

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