एम्स के जाँच दल ने सुशांत राजपूत मामले में जांचकर्ताओं के साथ जानकारियाँ साझा कीं

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने मुंबई के फ्लैट में मृत पाए गए थे। हालांकि मुंबई पुलिस ने कहा था कि यह आत्महत्या का मामला था, ऐसी संभावनाएँ जताई जा रही थीं कि यह हत्या भी हो सकती है। उच्चतम न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने कहा कि वह सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर जाँच कर रही है।

दिल्ली के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के जाँच दल ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं। डॉ. सुधीर गुप्ता की अध्यक्षता वाले जाँच दल का गठन केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुरोध पर किया गया था ताकि सुशांत सिंह राजपूत के शव परीक्षण और विसरा रिपोर्ट का अध्ययन किया जा सके।

सूत्रों ने बताया कि एक विस्तृत बैठक हुई जिसके दौरान एम्स के डॉक्टरों के जाँच दल ने सीबीआई को अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए। सूत्रों ने यह भी कहा कि पिछले 40 दिनों में सीबीआई के निष्कर्षों के साथ मिला कर एम्स जाँच दल के निष्कर्षों की पुष्टि की जा रही है। सूत्रों ने यह भी कहा कि एम्स जाँच दल के निष्कर्षों को इस मामले में विशेषज्ञ की राय के रूप में लिया जाएगा और इसके डॉक्टर अभियोजन पक्ष के गवाह होंगे।

सोमवार को जारी एक बयान में सीबीआई ने, जिसने एम्स के डॉक्टरों से इस बात का पता लगाने में मदद मांगी थी कि क्या इस अभिनेता की मौत में किसी षड्यंत्र का हाथ हो सकता है, कहा कि संस्था एक पेशेवर जांच कर रही है जिसमें सभी पहलुओं को देखा जा रहा है और फ़िलहाल किसी भी पहलू को खारिज नहीं किया गया है।

पिछले हफ्ते, सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील विकास सिंह ने ट्वीट किया था कि दिवंगत अभिनेता की हत्या को आत्महत्या में बदलने के लिए सीबीआई द्वारा की जा रही देरी से वह हताश हैं, तथा एम्स के जाँच दल का हिस्सा रहे एक डॉक्टर ने उन्हें बहुत पहले बता दिया था कि उनके द्वारा भेजी गई तस्वीरों से यह 200% निश्चित होता है कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या गला घोंट कर की गई थी और यह आत्महत्या नहीं थी। उन्होंने दावा किया था कि एम्स जाँच दल में शामिल एक डॉक्टर ने उनके साथ यह निष्कर्ष साझा किया था।

उनके द्वारा किए गए दावों के बाद डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा था कि जाँच दल की राय सबूतों के आधार पर बनी स्पष्ट और निर्णायक राय होगी। डॉ. गुप्ता ने कहा कि सिर्फ तस्वीरें देखकर कोई निर्णायक राय नहीं बनाई जा सकती है। 

सुशांत राजपूत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती के वकील ने जांच में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक अलग मेडिकल बोर्ड बनाए जाने की मांग की थी। उस माँग में कहा गया था कि डॉ. गुप्ता की अगुवाई वाले एम्स जाँच दल के सदस्य डॉक्टर द्वारा मात्र तस्वीरों के आधार पर 200 प्रतिशत सुनिश्चित निष्कर्ष निकालना एक खतरनाक प्रवृत्ति है। सतीश मानेशिंदे ने कहा था कि जांच को निष्पक्ष और किसी भी दखलंदाजी से मुक्त रखने के लिए सीबीआई को एक नया मेडिकल बोर्ड गठित करना चाहिए। 

रिया चक्रवर्ती पर सुशांत राजपूत के पटना स्थित परिवार ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने, पैसे के लिए उनका शोषण करने और उनकी मौत में भूमिका निभाने का आरोप लगाया था। उन्हें 9 सितंबर को इस मामले में ड्रग्स के पहलू की जांच कर रहे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किया गया था तथा फ़िलहाल वह जेल में हैं।

 

उनकी जमानत याचिका एक सत्र अदालत द्वारा पहले ही खारिज कर दी गई थी, तथा मंगलवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय के समक्ष दोबारा जमानत याचिका दायर की गई है। उन्हें 'ड्रग माफ़िया सिंडिकेट का एक सक्रिय सदस्य' बताते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उन पर सुशांत राजपूत के लिए ड्रग्स का इंतज़ाम करने का आरोप लगाया है।