चीन ने जोखिम की चिंताओं के बावजूद हजारों लोगों को कोरोनावायरस के अपरीक्षित टीके दिए

चीन की जल्दबाज़ी ने वैश्विक विशेषज्ञों को हतप्रभ कर दिया है। किसी अन्य राष्ट्र ने इतने बड़े पैमाने पर कोरोनावायरस के अपरीक्षित टीकों के इंजेक्शन लोगों को नहीं लगाए हैं।

 

सबसे पहले यह टीके राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के श्रमिकों को लगाए गए। फिर सरकारी अधिकारियों और वैक्सीन कंपनी के कर्मचारियों को, तथा उसके बाद शिक्षकों, सुपरमार्केटों के कर्मचारियों और जोखिम भरे क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को यह टीके लगाए जाएँगे। दुनिया में अभी भी एक प्रामाणिक कोरोनावायरस वैक्सीन की खोज चल रही है, लेकिन इसके बावजूद चीनी अधिकारियों ने परीक्षण प्रक्रिया के दायरे से बाहर सैकड़ों नहीं, हजारों की संख्या में लोगों को यह टीके लगा दिए हैं।

 

इन अपरीक्षित टीकों के हानिकारक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। साथ ही इन टीकों का व्यापक उपयोग सहमति के अधिकार से जुड़े मुद्दों को भी उठाता है, खासकर चीनी वैक्सीन निर्माताओं और राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के कर्मचारियों को यह टीके लगाए जाने के मामले में। इन फर्मों ने इन लोगों से इस टीके की खुराक लेने से पहले ऐसे गैर-कानूनी समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा है जो उन्हें मीडिया से इस बारे में बात करने से प्रतिबंधित करते हैं।

 

यह स्पष्ट नहीं है कि चीन में अभी तक कितने लोगों को यह टीके लगाए जा चुके हैं। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी सिनफार्मा ने कहा है कि हजारों लोगों ने यह टीके लगवा लिए हैं। बीजिंग स्थित कंपनी सिनोवैक ने कहा कि बीजिंग में 10,000 से अधिक लोगों को इस टीके का इंजेक्शन लगाया गया था।

 

वहीं दूसरी तरफ़ चीन का कहना है कि डब्ल्यूएचओ ने उसे कोरोनावायरस वैक्सीन आपातकालीन उपयोग कार्यक्रम के लिए अपना समर्थन दिया था। 

 

डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने इस महीने जेनेवा में कहा था कि राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण मौजूदा आपातकालीन स्थिति में अपने स्वयं के अधिकार क्षेत्र में चिकित्सा उत्पादों के उपयोग को मंजूरी दे सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसका वर्णन 'अस्थायी समाधान' के रूप में किया था।

 

एक चीनी स्वास्थ्य अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन को प्रायोगिक कोरोनावायरस वैक्सीन का प्रशासन शुरू करने के लिए तभी अपना समर्थन दे दिया था, जबकि नैदानिक ​​परीक्षण अभी चल ही रहे थे।

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के एक अधिकारी झेंग झोंगवेई के अनुसार, चीन ने जुलाई में अपने आपातकालीन कार्यक्रम की शुरुआत जून के अंत में डब्ल्यूएचओ से संपर्क स्थापित करने के बाद की थी।

 

संक्रमण के उच्च जोखिम के दायरे में आने वाले लाखों आवश्यक श्रमिकों और अन्य सीमित समूहों को यह टीका दिया गया है, हालाँकि तब तक इसकी प्रभावकारिता और सुरक्षा पूरी तरह से सिद्ध नहीं हुई थी क्योंकि इसके नैदानिक ​​परीक्षण अभी अधूरे हैं।

 

झेंग ने एक समाचार सम्मेलन में कहा, "जून के अंत में चीन की राज्य परिषद ने COVID-19 वैक्सीन आपातकालीन उपयोग कार्यक्रम की एक योजना को मंजूरी दी थी।"

 

झेंग ने कहा, "इस अनुमोदन के बाद 29 जून को हमने चीन में डब्ल्यूएचओ कार्यालय के संबंधित प्रतिनिधियों के साथ संचार किया और डब्ल्यूएचओ से समर्थन प्राप्त किया।" चीन में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि ने इस बारे में पूछे जाने पर कोई टिप्पणी नहीं की।

 

डब्लूएचओ के अधिकारी ने कहा कि परीक्षणों का चरण 3 पूरा होने में ही इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान निहित है। बीजिंग ने सार्वजनिक रूप से अपने आपातकालीन उपयोग कार्यक्रम का पूरा विवरण जारी नहीं किया है।

 

राज्य-समर्थित चाइना नेशनल बायोटेक ग्रुप (CNBG) द्वारा विकसित दो वैक्सीनें और सिनोवैक बायोटेक द्वारा विकसित एक वैक्सीन इस समय परीक्षण के तीसरे चरण में हैं, और इस टीकाकरण आपातकालीन उपयोग कार्यक्रम में शामिल हैं। इनके अतिरिक्त कैनसिनो बायोलॉजिक्स द्वारा विकसित एक चौथी प्रायोगिक वैक्सीन को जून में चीनी सेना में इस्तेमाल करने की मंजूरी दी गई थी।

 

झेंग ने कहा कि चीन की COVID-19 टीकों की वार्षिक उत्पादन क्षमता 2020 के अंत तक लगभग 61 करोड़ खुराक तथा 2021 तक 1 अरब खुराक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन में इस वैक्सीन की कीमत आम जनता के लिए सस्ती रखी जाएगी।