तुलसी के यह अतुल्य लाभ आपको रखेंगे स्वस्थ

तुलसी मानव जाति को ज्ञात सबसे पुरानी जड़ी बूटियों में से एक है। इस पौधे के पत्तों में मौजूद वाष्पशील तेलों में अनेकों औषधीय व स्वास्थ्यवर्धक गुणों से युक्त तत्व होते हैं।
भारत, नेपाल, भूटान इत्यादि देशों के घर-घर में यह पौधा उगाया जाता है, यहां तक कि शहरों में स्थित फ्लैटों की बालकनियों में भी गमलों में इसके पौधे देखे जा सकते हैं। अपने इन गुणों के कारण तुलसी को पवित्र मानते हुए इसे प्रसाद के रूप में देवताओं को अर्पित किया जाता है। कुछ लोग कहते हैं, कि तुलसी के पत्ते चबाना भी निषिद्ध है, इन्हें एक ही बार में निगलना चाहिए।
तुलसी की अनेकों प्रजातियाँ उगाई जाती हैं, जिन में प्रमुख हैं मीठी तुलसी, नींबू तुलसी, इतालवी या घुंघराली तुलसी, पवित्र तुलसी तथा थाई तुलसी। तुलसी की गंध और स्वाद इसमें मौजूद वाष्पशील तेलों की सांद्रता पर आधारित होती है।
तुलसी के पत्ते भोजन के गुणों को संरक्षित करने और बढ़ाने के अतिरिक्त स्वस्थ आंत से मजबूत प्रतिरक्षा तक बहुत से औषधीय लाभ भी प्रदान करते हैं। उन में से कुछ प्रमुख निम्न हैं।

1. उत्तम पाचन शक्ति
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार तुलसी पाचन को मज़बूत बनाने में सहायक है। यह पाचन और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करती है और इसकी पत्तियों में मौजूद यूजेनॉल पाचन तंत्र को नियमित करना सुनिश्चित करता है। तुलसी शरीर के भीतर एसिड को भी संतुलित करती है और शरीर के लिए उचित पीएच स्तर को पुनर्स्थापित करती है।

2. सूजन प्रतिरोधी गुण
तुलसी और इसमें मौजूद तत्वों के सूजन प्रतिरोधी गुण विभिन्न बीमारियों में सहायक साबित हो सकते हैं। इसमें मौजूद यूजेनॉल, सिट्रोनेलोल और लिनालूल जैसे शक्तिशाली तेल एंजाइम नियंत्रक गुणों के माध्यम से सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इससे दिल की बीमारी, संधिशोथ और आँतों में सूजन की स्थिति में लाभ लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त तुलसी का सेवन बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, सर्दी, खांसी, फ्लू इत्यादि से भी राहत दिला सकता है। तुलसी के पत्तों में ऐसे गुण होते हैं जो हल्के फ्लू और ठंड से बचाव करते हैं।
3. फ्री रेडिकल्स पर प्रभावी नियंत्रण
तुलसी में प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट की बड़ी मात्रा है, जो फ्री रेडिकल्स से शरीर के ऊतकों की रक्षा में मदद कर सकती है। फ्री रेडिकल्स अस्थिर परमाणु होते हैं तथा स्थिर होने के लिए वे अन्य परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन लेते हैं और श्रृंखला बनाते हैं। फ्री रेडिकल्स की ये श्रृंखलाएं ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण बनती हैं और शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती हैं। शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने के लिए एंटीऑक्सीडेंट तत्वों का सेवन अवश्य करना चाहिए। तुलसी में दो घुलनशील फ्लेवोनोइड एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जिन्हें ओरिएंटिन और विसेनीनेयर के नाम से जाना जाता है। ये शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं, सेलुलर संरचना व डीएनए और उम्र बढ़ने के दुष्प्रभावों से त्वचा की रक्षा करते हैं।
4. त्वचा के लिए लाभदायक
तुलसी में मौजूद शक्तिशाली तेल त्वचा को भीतर से साफ़ करने में मदद करते हैं। यह त्वचा की सफाई के लिए एक उत्कृष्ट समाधान है तथा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिनकी त्वचा तैलीय है। यह त्वचा के छिद्रों को बंद करने वाली गंदगी और अशुद्धियों को हटाने में भी मदद करता है। तुलसी के पत्तों, चंदन के बुरादे और गुलाब जल को मिलाकर एक लेप बनाएँ। इस लेप को अपने चेहरे पर लगाएं और इसे 20 मिनट तक यथावत रहने दें। फिर इसे ठंडे पानी से धो लें। तुलसी के प्रबल सूजन प्रतिरोधी व रोगाणुरोधी गुण आपकी त्वचा पर मुँहासे बनने से रोकने में मदद करेंगे।